Wheat Export Ban : पिछले साल से अधिक है गेहूं उत्पादन का अनुमान, निर्यात पर रोक के पीछे यह है गणित !

Wheat Export Ban : पिछले साल से अधिक है गेहूं उत्पादन का अनुमान, निर्यात पर रोक के पीछे यह है गणित !
गेहूं न‍िर्यात पर रोक के फैसले से बाजार में उथल-पुथल शुरू हो गई है. (सांकेत‍िक तस्‍वीर)

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Wheat Export Ban : रूस- यूक्रेन युद्ध की वजह से देश के अंदर गेहूं का दाम MSP से अधिक चल रहा है. साथ ही इस बार गेहूं की सरकारी खरीद भी लक्ष्य से बहुत ही पीछे चल रही है. माना जा रहा है कि निर्यात पर रोक के इस फैसले से देश के अंदर गेहूं की सरकारी खरीद बढ़ेगी.

रूस- यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) जारी है. इस बीच कई देशों में खाद्यान्न संकट गहराया हुआ है. मसलन गेहूं के गढ़ कहे जाने वाले इन दोनों राष्ट्रों से कई देशों को होने वाली गेहूं की आपूर्ति पूरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे में भारतीय गेहूं (Indian Wheat) की मांग दुनिया भर में बढ़ी हुई है. नतीजतन देश के अंदर गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक दाम में बिक रहा है. इस बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार रात से गेहूं के निर्यात पर तत्काल रोक लगा दी है. कारण बताया जा रहा है कि देश में गेहूं का उत्पादन (Wheat Production) कम होने की वजह से यह फैसला लिया गया है, लेकिन गेहूं के कम उत्पादन को लेकर सरकार की तरफ से अभी तक कोई भी आंकड़ें जारी नहीं किए गए हैं. बल्कि सरकार ने फरवरी (मई में संशाेधित अनुमान में भी ) में भी पिछले साल की तुलना में इस वर्ष अधिक गेहूं के उत्पादन का अनुमान जारी किया था. इस बीच निर्यात पर रोक से बाजार में भारी उथल-पुथल है. आईए जानते हैं कि सरकार ने कितने गेहूं के उत्पादन का अनुमान लगाया हुआ है और निर्यात पर रोक का संभावित गणित क्या है.

पहले हाल-ए- गेहूं जान लेते हैंं

गेहूं उत्पादन को लेकर सरकार की तरफ से जारी अनुमान के साथ ही निर्यात पर रोक के संभावित गणित को जानने से पहले हाल-ए-गेहूं जान लेते हैं. मौजूदा समय में देश के अंदर गेहूं की मांग अपने चरम पर बनी हुई है. आलम यह है गेहूं इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक दाम पर चल रहा है. सरकार ने गेहूं का MSP 2015 रुपये प्रतिक्विंटल तय किया हुआ है, लेकिन मौजूदा समय में बाजार के अंदर गेहूं का भाव प्रतिक्विंटल 2400 रुपये प्रतिक्विंटल तक चल रहा है. नतीजतन सरकारी की तरफ से स्थापित किए गए खरीदी केंद्रों में गेहूं की आवक में रिकार्ड कमी दर्ज की गई है. हालांकि पंजाब के किसान इस बार गर्मी की वजह से कम उत्पादन होने की बात भी कर रहे हैं. वहां कम आवक की वजह से 90 फीसदी मंडियां बंद कर दी गई है, लेकिन इसके बाद भी पंजाब की गेहूं खरीद के केंद्रीय पूल में सबसे अधिक हिस्सेदारी है.

लक्ष्य से आधी भी नहीं हुई है अब तक खरीद, 13 साल में सबसे कम

रूस-यूक्रेन का असर गेहूं के बाजार में सबसे अधिक पड़ा है. इस वजह से गेहूं के दाम MSP से अधिक चल रहे हैं. आलम यह है कि इस बार MSP पर गेहूं की खरीद अभी तक लक्ष्य से आधी भी नहीं हो पाई है. वहीं इस वर्ष 13 साल में सबसे कम गेहूं खरीद का अनुमान जताया जा रहा है. असल में इस बार सरकार ने 444 टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है. जिसमें से 5 मई तक 156 टन की खरीद ही हुई है. हालांकि इसमें बढ़ोतरी होने का अनुमान है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार 13 साल में सबसे कम गेहूं की खरीद होगी.

संशोधित अनुमान में भी पिछले साल की तुलना में अधिक उत्पादन का अनुमान

केंद्र सरकार के कृषि व किसान कल्याण विभाग और अर्थ व सांंख्यिकी निदेशालय ने सभी फसलों के कुल उत्पादन को लेकर फरवरी 2022 में अग्रिम अनुमान रिपोर्ट जारी की थी. जिसके तहत वर्ष 2021-22 में रबी सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन 2020-21 की तुलना में तकरीबन 2 मिलियन टन अधिक होने का अनुमान है. जारी की गई अग्रिम अनुमान रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020-21 में रबी सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन 109.59 मिलियन टन हुआ था, वर्ष 2021-22 में रबी सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन का अग्रिम अनुमान 111.32 मिलियन टन का है, जबकि लक्ष्य 111 मिलियन टन है. हालांकि मई के पहले सप्ताह में कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादन का संशोधित अनुमान जारी किया था. जिसके तहत उत्पादन में कटौती की गई थी. संशोधित अनुमान में इस रबी सीजन में 10.5 मिलियन टन का उत्पादन होने की बात कही गई थी,जो भी पिछले साल की तुलना में अधिक था.

निर्यात के रिकार्ड लक्ष्य और फ्री राशन के वायदे से तो नहीं बिगड़ा गणित

गेहूं के निर्यात पर लगी रोक के बाद से बाजार में उथल-पुथल है. निर्यात पर रोक का यह फैसला तब लिया गया है. जब बाजार में गेहूं से जुड़े उत्पादों के दाम ऊंचाई पर पहुंचने से शुरू हो गए हैं, लेकिन बाजार के विशेषज्ञ निर्यात पर रोक का कारण उत्पादन में कमी को नहीं मान रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक निर्यात के रिकार्ड लक्ष्य और फ्री राशन के वायदे निर्यात पर रोक की एक प्रमुख वजह हो सकती है. असल में सरकार ने बीते साल 70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था, जबकि इस बार गेहूं निर्यात का लक्ष्य 100 लाख टन निर्धारित किया गया हुआ है. जो सीधी तौर पर 45 फीसदी अधिक है. वहीं कई राज्यों ने फ्री राशन बांटने की घोषणा भी की हुई है. ऐसे में गेहूं उत्पादन में मामूली कमी से दोनों लक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावनाएं हैं. जिससे बाजार में गेहूं की कमी हो सकती है.

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इस संबंध में कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि बेशक फ्री राशन वितरण और रिकार्ड निर्यात के लक्ष्य से देश के अंदर गेहूं की संभावित कमी हो सकती है. उन्होंने कहा कि अभी इस फैसले का बाजार में असर नहीं दिखाई दे रहा है, लेकिन अभी सरकार को गेहूं की घरेलू खपत के आंकड़े जारी करने हैं, जिसके बाद बहुत कुछ स्पष्ट हो जाएगा.