Wheat Export Ban: गेहूं निर्यात पर रोक के पीछे क्या हैं 5 प्रमुख कारण, यहां जानें

Wheat Export Ban: गेहूं निर्यात पर रोक के पीछे क्या हैं 5 प्रमुख कारण, यहां जानें
गेहूं न‍िर्यात पर रोक के फैसले से बाजार में उथल-पुथल शुरू हो गई है. (सांकेत‍िक तस्‍वीर)

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Wheat Export Ban : रूस- यूक्रेन युद्ध की वजह से देश के अंदर गेहूं का दाम MSP से अधिक चल रहा है. साथ ही इस बार गेहूं की सरकारी खरीद भी लक्ष्य से बहुत ही पीछे चल रही है. माना जा रहा है कि निर्यात पर रोक के इस फैसले से देश के अंदर गेहूं की सरकारी खरीद बढ़ेगी.

रूस- यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) जारी है. इस बीच कई देशों में खाद्यान्न संकट गहराया हुआ है. मसलन गेहूं के गढ़ कहे जाने वाले इन दोनों राष्ट्रों से कई देशों को होने वाली गेहूं की आपूर्ति पूरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे में भारतीय गेहूं (Indian Wheat) की मांग दुनिया भर में बढ़ी हुई है. नतीजतन देश के अंदर गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक दाम में बिक रहा है. इस बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार रात से गेहूं के निर्यात पर तत्काल रोक लगा दी है. कारण बताया जा रहा है कि देश में गेहूं का उत्पादन (Wheat Production) कम होने की वजह से यह फैसला लिया गया है. इस फैसले के बाद से बाजार में भारी उथल-पुथल है. आईए समझने की कोशिश करते हैं कि गेहूं निर्यात पर रोक के पीछे वजह क्या है. इस फैसले के पीछे 5 प्रमुख कारण कौन से हैं.

पिछले साल से कम उत्पादन होने का अनुमान

गेहूं निर्यात के फैसले रोक के पीछे का मुख्य कारण पिछले साल से कम उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है. असल में फरवरी तक पिछले साल से अधिक उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन मई में सरकार ने संशोधित अनुमान जारी किए हैं, जिसमें कम उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है. असल मेंकृषि व किसान कल्याण विभाग और अर्थ व सांंख्यिकी निदेशालय ने सभी फसलों के कुल उत्पादन को लेकर फरवरी 2022 में अग्रिम अनुमान रिपोर्ट जारी की थी. जिसके तहत वर्ष 2021-22 में रबी सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन 2020-21 की तुलना में तकरीबन 2 मिलियन टन अधिक होने का अनुमान लगाया था. जारी की गई अग्रिम अनुमान रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020-21 में रबी सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन 109.59 मिलियन टन हुआ था, वर्ष 2021-22 में रबी सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन का अग्रिम अनुमान 111.32 मिलियन टन का लगाया गया था, लेकिन मई के पहले सप्ताह में कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादन का संशोधित अनुमान जारी किया था. जिसके तहत इस रबी सीजन में 105 मिलियन टन का उत्पादन होने का अनुमान है.

MSP से अधिक भाव में बिक रहा है गेहूं, इससे बढ़ी महंगाई

गेहूं के निर्यात पर लगी रोक का एक मुख्य कारण गेहूं का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक बिकना भी है. असल में रूस और यूक्रेन की युद्ध की वजह से भारतीय गेहूं की मांग विदेशों में काफी बढ़ गई है. इस वजह से बाजार के खुले बाजारों में गेहूं के दाम MSP से अधिक चल रहे हैं. सरकार ने गेहूं का MSP 2015 रुपये प्रतिक्विंटल तय किया हुआ है, लेकिन मौजूदा समय में बाजार के अंदर गेहूं का भाव प्रतिक्विंटल 2400 रुपये प्रतिक्विंटल तक चल रहा है.नतीजतन सरकारी की तरफ से स्थापित किए गए खरीदी केंद्रों में गेहूं की आवक में रिकार्ड कमी दर्ज की गई है. वहीं बाजार में गेहूं से बने खाद्य उत्पादों के दाम नई ऊंंचाईयों पर हैं.

लक्ष्य से आधी भी नहीं हुई है अब तक खरीद, 13 साल में सबसे कम

रूस-यूक्रेन युद्ध व कम उत्पादन का असर गेहूं के भारतीय बाजार में सबसे अधिक पड़ा है. इस वजह से गेहूं के दाम MSP से अधिक चल रहे हैं और गेहूं खरीद की सरकारी प्रक्रिया पूरी तरह से प्रभावित हुई है. आलम यह है कि इस बार MSP पर गेहूं की खरीद अभी तक लक्ष्य से आधी भी नहीं हो पाई है. वहीं इस वर्ष 13 साल में सबसे कम गेहूं खरीद का अनुमान जताया जा रहा है. असल में इस बार सरकार ने 444 टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है. जिसमें से 5 मई तक 156 टन की खरीद ही हुई है. हालांकि इसमें बढ़ोतरी होने का अनुमान है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार 13 साल में सबसे कम गेहूं की खरीद होगी.

निर्यात का रिकार्ड लक्ष्य और फ्री राशन के वायदे से भी बिगड़ा गणित

गेहूं के निर्यात पर लगी रोक के बाद से बाजार में उथल-पुथल है. निर्यात पर रोक का यह फैसला तब लिया गया है. जब बाजार में गेहूं से जुड़े उत्पादों के दाम ऊंचाई पर पहुंचने से शुरू हो गए हैं, लेकिन बाजार के विशेषज्ञ निर्यात पर रोक का कारण निर्यात के रिकार्ड लक्ष्य और फ्री राशन के वायदे को भी मान रहे हैं. असल में सरकार ने बीते साल 70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था, जबकि इस बार गेहूं निर्यात का लक्ष्य 100 लाख टन निर्धारित किया गया हुआ है. जो सीधी तौर पर 45 फीसदी अधिक है. वहीं कई राज्यों ने फ्री राशन बांटने की घोषणा भी की हुई है. ऐसे में गेहूं उत्पादन में कमी के बीच दोनों लक्ष्यों के प्रभावित होने की संभावनाएं हैं. जिससे बाजार में गेहूं की कमी हो सकती है.

इस संबंध में कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि बेशक फ्री राशन वितरण और रिकार्ड निर्यात के लक्ष्य पूरा होने हसे देश के अंदर गेहूं की संभावित कमी हो सकती है. उन्होंने कहा कि अभी इस फैसले का बाजार में असर नहीं दिखाई दे रहा है, लेकिन अभी सरकार को गेहूं की घरेलू खपत के आंकड़े जारी करने हैं, जिसके बाद बहुत कुछ स्पष्ट हो जाएगा.

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गेहूं स्टोरेज पर लगाम लगाने की तैयारी

गेहूं निर्यात तक एक प्रमुख कारण गेहूं स्टोरेज पर लगाम लगाने को भी माना जा रहा है. असल में रबी सीजन में गेहूं की आवक होती है. वहीं मौजूदा समय में ही रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर बनी रहेगी. जिसमें गेहूं के भाव मौजूदा दाम से अधिक होने की संभावानाएं हैं. ऐसे में अटकलें लगने लगी हैं किसान से लेकर व्यापारी तक इस वक्त गेहूं का स्टोरेज कर रहे हैं. जिस वजह से भी गेहूं की सरकारी खरीद प्रभावित हुई है. ऐसे में निर्यात पर रोक के इस फैसले से सरकार गेहूं के स्टोरेज पर रोक लगाने जा रही है. जिससे सरकारी खरीद बढ़ेगी.