यूपी के इस जिले में दलहन और तिलहन फसलों की बंपर पैदावार! मटर उत्पादन का टूटेगा रिकार्ड

यूपी के इस जिले में दलहन और तिलहन फसलों की बंपर पैदावार! मटर उत्पादन का टूटेगा रिकार्ड
बुंदेलखंड के हमीरपुर ज‍िले में खेत में खड़ी दलहन की फसल व साथ ही में जारी कटाई.

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बुंदेलखंड की धरती को दलहन और तिलहन की फसलों के लिए अनुकूल माना जाता है. असल में यहां का मौसम शुष्क रहता है औरदलहनी और तिलहन की फसलों को मुख्यता शुष्क जलवायु की ही आवश्यकता होती है.

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड स्थित जिला हमीरपुर (Hamirpur) इन दिनों अपने कृषि उत्पादन को लेकर सुर्खियों में है. बेशक बुन्देलखण्ड को दलहन और तिलहन (Pulses and Oilseeds) का कटोरा कहा जाता है, लेकिन इस कटोरे को पूरी तरह से अकेले हमीरपुर ने ही भर दिया है. आलम यह है कि इस बार हमीरपुर जिले में दलहन और तिलहन फसलों की बंपर पैदावार होने का अनुमान है. वहीं मटर का उत्पादन भी कई रिकार्ड तोड़ते हुए दिख रहा है. असल में यहां के किसानों ने इस बार कृषि विभाग (Agriculture Department) द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक दलहन और तिलहन का उत्पादन किया है. जिसमें से मटर का तो जिले में रिकार्ड उत्पादन दर्ज किया गया है. ऐसे में कई सालों के बाद किसानों के चेहरों में खुशी लौटी है. वहीं कृषि विभाग इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रहा है.

दलहन और तिलहन की बुवाई के रकबे में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी

बुंदेलखंड में रबी सीजन में दलहन की फसलों के तौर पर मुख्य रूप से चना, मटर और मसूर की बुवाई की जाती है. तो वहीं तिलहन फसलों के तौर पर सरसों, अलसी और तोरिया बोया जाता है. कृषि विभाग की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इस रबी सीजन दलहन और तिलहन की बुवाई के रकबे में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. हमीरपुर कृषि विभाग के अनुसार इस बार रबी सीजन में दलहनी फसलों की बुवाई के 126039 हेक्टेयर और तिलहनी फसलों की बुवाई 19916 हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित किया था. जिसके सापेक्ष जिले में 144869 हेक्टयर दलहनी और 23741 हेक्टेयर तिलहनी फसलें बोई गई थी. जिसकी कटाई इन दिनों जारी है. जिसके उत्पादन का अंतिम आंकड़ें जारी किए जाने हैं.

जिला कृषि उपनिदेशक डॉ हरिशंकर बताते हैं कि इस बार बीते 5 सालों में सबसे अधिक रकबे में दलहनी और तिलहनी फसलों की पैदावार किसानों ने की है. उन्होंने कहा कि इस बार कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि से कुछ नुकसान हुआ था, लेकिन इसके बावजूद भी इस बार रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान है.

मटर बुवाई का रकबा 3 गुना अधिक था

जिले में मटर उत्पादन के रिकार्ड टूटने के पीछे भी मटर बुवाई का रकबा भी रहा है. असल में इस बार जिले में रिकार्ड रकबे में मटर की खेती किसानों ने की है, जो अनुमान और लक्ष्य की तुलना में 3 गुना अधिक है. जिला कृषि विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार अनुमान और लक्ष्य तय किया गया था कि किसान 11722 हेक्टेयर में मटर की बुवाई करेंगे, लेकिन किसानों ने लक्ष्य के इतर 33412 हेक्टेयर में मटर की बुवाई की है. इस वजह से रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान है.कृषि जिला उप निदेशक डॉ हरी शंकर की मानें तो इस साल फरवरी माह से ही हीट वेव चलने लगी थी. इस लिए कुछ फसलों के दानों में कमजोरी आई है. इसके बाद भी उत्पादन उम्मीद से ज्यादा हुया है, मटर तो 3 गुना तक अधिक हुआ है. अगर मौसम थोड़ा और साथ दे देता तो फिर इन फसलों का उत्पादन कई सालों का रिकार्ड तोड़ देता.

फसलें – बुआई का लक्ष्य (हेक्टेयर में) – किसानों की तरफ से की गई बुआई (हेक्टेयर में)

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  • चना 80773 – 79887
  • मटर 11722 – 33412
  • मसूर 22654 – 31570
  • सरसों – 15670 – 19225
  • अलसी- 2948 -3221
  • तोरिया – 1293 -1295

इसलिए बुंदेलखंड दलहन और तिलहन उत्पादन के लिए है अनुकूल

बुंदेलखंड की धरती को दलहन और तिलहन की फसलों के लिए अनुकूल माना जाता है. असल में बुंदेलखंड में 1050 मिली मीटर के करीब वर्षा होती है, इसके बाद भी यह सूखाग्रस्त रहता है. इसका मुख्य कारण यह है कि बुंदेलखंड में जुलाई से लेकर सितम्बर तक ही कुल वर्षा का 90 से 95 फीसदी बारिश हो जाती है. जिसके बाद यहां का मौसम शुष्क रहता है औरदलहनी और तिलहन की फसलों को मुख्यता शुष्क जलवायु की ही आवश्यकता होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में दलहन और तिलहन का उत्पादन अच्छा होता है.